Thursday, May 05, 2016

#कुछ_तुम्हारे_लिए (BOOK PROMOTION)

कोई भी किताब तब तक अपना मुकाम नहीं पाती जब तक उसे उसके पाठक न मिल जाए और बात सिर्फ पाठक के मिलने भर से खत्म नहीं होती । उस किताब को सही मायनों में किताब बनाती है उसके पाठकों की प्रतिक्रिया, उनकी समीक्षा , और उनकी आलोचना । मैं कोई बड़ा लेखक या कवि नहीं । आज का एक सीधा-साधा युवक हूँ जिसे शब्दों की बाजीगरी नहीं आती । वो तो बस शब्दों को जोड़-तोड़ कर कोशिश करता है ऐसे साँचों में ढ़ालने की जिसे महसूस कर लिख सके वो ‪#‎कुछतुम्हारेलिए‬ । अब, जब "कुछ तुम्हारे लिए" को छपे चार महीने होने जा रहे इस किताब को अपने पुरे होने का इंतज़ार है । इसे इंतज़ार है अपने पाठकों के प्यार का, स्नेह का, आशीर्वाद का , उनकी आलोचना का, समीक्षा का । आप सबों की प्रतिक्रिया का इंतज़ार है । मुझे और मुझसे अधिक मेरी किताब "#कुछतुम्हारेलिए" को । (जो अभी तक "कुछ तुम्हारे लिए" ‪#‎kuchtumhareliye‬ नहीं पढ़ पाये हैं वो इसे फ्लिपकार्ट के नीचे दिए गए लिंक से ऑडर कर सकते हैं । फ्लिपकार्ट के अलावा यह किताब इंफ़िबीम & amazon पर भी उपलब्ध है । )
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